वो यार पुराने ले आओ


वो गुमशुदा हंसी के अफसाने ले आओ,

दिल कह रहा है, वो यार पुराने ले आओ।

जिनके साथ बैठकर भूल जाते थे हर ग़म,

वो बेफिक्र दिन, वो बहाने ले आओ।


वो गलियां जहां पर आवाजें गूंजी थीं,

जिनमें हमारी दोस्ती की कहानियां बूंजी थीं।

वो गुपचुप मुलाकातें, वो चुपके से बातें,

वो दिल के करीब, वो दीवाने ले आओ।

वो बेफिक्र दिन, वो बहाने ले आओ।


दुनिया की भीड़ ने हमें अलग कर दिया,

पर दिल ने कभी उन रिश्तों को मरने न दिया।

वो झगड़े, वो मनाने के तराने ले आओ,

वो कंधे का सहारा, वो ठिकाने ले आओ।

वो बेफिक्र दिन, वो बहाने ले आओ।


वो हंसी, वो ख्वाब, वो चाय की दुकान,

वो बारिश में घूमना, वो मस्त जुबान।

आज भी बुलाती है यादों की वो आवाज़,

वो यार पुराने, वो जज़्बात ले आओ।

वो बेफिक्र दिन, वो बहाने ले आओ।


"ये जिंदगी दो पल की है, क्यों न इसे सजाएं,

वो खोए हुए यारों को फिर से अपनाएं।

चलो साथ बैठकर, वक्त फिर से बिताएं,

वो यार पुराने, फिर से करीब लाएं।"

 वो बेफिक्र दिन, वो बहाने ले आओ।

    ~ Poet= Eoin Sushant 

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

अंधेरों का आलम

"चौराहे पर खड़ा मन"

🎓 The Clockmaker’s Gift 🕰️