अंधेरों का आलम
अंधेरों में डूबा हर सपना यहाँ,
जैसे कोई रोशनी को तरसे जहाँ।
चाहतें बिखरीं, उम्मीदें मरीं,
दिल की तन्हाई और गहरी हुई।
सांसें चलती हैं, पर ज़िंदा नहीं,
मन के ज़ख्म दिखते पर दिखते कहीं।
चीखें दबीं, आंसू बहें चुपचाप,
जैसे किसी ने छीन लिया हर आप।
हर खुशी अब पराई सी लगती है,
दिल की धड़कन भी रुकती सी लगती है।
आसमान भी अब गहराता है,
हर रात दर्द नया सुनाता है।
जो हंसते हैं, वो भी रोते हैं भीतर,
अकेलेपन का दंश हर दिल के भीतर।
कहना तो चाहते हैं, पर जुबां रुक जाती है,
दर्द की ज़ुबां सबको कहां समझ आती है।
पर ये भी सच है, सवेरा आएगा,
हर अंधेरा एक दिन ढल जाएगा।
अपने आप को मत यूं छोड़ देना,
क्योंकि टूटे दिल भी नए सपने सजाएंगे।
इस अंधेरे में भी कहीं रोशनी है,
हर दर्द के पीछे छिपी कोई खुशी है।
बस एक कदम आगे बढ़ाना
है,
इस खालीपन को हराना है।
~Poet= Eoin Sushant
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