तू क्या जाने..
मैंने तुझे पाने की हर कोशिश की थी,
हर दुआ में बस तेरी ही ख़्वाहिश की थी।
तू क्या जाने, कितने रास्ते बदले मैंने,
तेरे लिए अपने ही सपनों से समझौते किए मैंने।
लोगों ने जो कहा, उसे झूठा बता दिया,
अपने ही दिल को तेरे नाम सज़ा दिया।
तू क्या जाने, कैसी-कैसी रातें रोकर कटीं,
हर सुबह तेरी उम्मीद में ही आँखें खुलीं।
हर गलती तेरी हँसकर माफ़ करता रहा,
हर बार तुझे प्यार से समझाता रहा।
पर तूने मेरी ख़ामोशी भी न समझी,
मेरी मोहब्बत की गहराई भी न समझी।
तुझे मालूम था कि तेरे हर लफ़्ज़ से दर्द होता है,
फिर भी वही ज़ख्म देना तेरा रोज़ का किस्सा होता है।
किस-किस हालात ने मुझे तोड़ा, तू क्या जाने,
मैं मुस्कुराता रहा, मगर अंदर से बिखरता रहा।
अब बस मौत का आना ही बाकी रह गया था,
बाकी हर दर्द तो ज़िंदगी दे ही चुकी थी।
फिर भी तेरी ख़ुशी की दुआ करता रहा,
क्योंकि मेरी मोहब्बत, मेरी शिकायतों से बड़ी थी।
शायरी
तुझे पाने की हर कोशिश अधूरी रह गई,
मेरी हर दुआ तेरे दर पर ही ठहर गई।
तूने दर्द दिया, मैं मुस्कुराता रहा,
मेरी पूरी ज़िंदगी बस तुझे समझाते-समझाते गुज़र गई।
Eoin Sushant
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